92% अंक आए, फिर भी छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम, वॉयस मैसेज ने किया झकझोर
जालंधर 18 अप्रेल (ब्यूरो) : यूपी के कानपुर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां दसवीं कक्षा में 92% अंक हासिल करने के बावजूद एक छात्रा ने सुसाइड कर लिया। छात्रा का लक्ष्य 95% अंक लाने का था और इसी टारगेट से तीन फीसदी कम नंबर आने के कारण वह गहरे तनाव में आ गई।
पनकी क्षेत्र के रतनपुर शिवालिक भवन में रहने वाली वैशाली सिंह केंद्रीय विद्यालय, अर्मापुर की छात्रा थी। सीबीएसई बोर्ड के रिजल्ट आने के बाद से ही वह काफी डिप्रेस दिख रही थी। गुरुवार शाम उसने अपने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। इस दर्दनाक कदम से पहले उसने अपने कुछ दोस्तों को मोबाइल पर एक वॉयस मैसेज भी भेजा था, जिसमें उसने कहा कि अब वह जीना नहीं चाहती और खुद को “जिंदा लाश” महसूस कर रही है।
वैशाली के पिता वीरेंद्र सिंह की दो साल पहले मौत हो चुकी थी। घर की जिम्मेदारी उसकी मां काजल पर थी, जो एक मॉल में जॉब करती हैं। परिवार में उसका एक भाई प्रिंस भी है, जिसने पहले ही पढ़ाई छोड़ दी थी। घटना वाले दिन मां काम पर गई हुई थीं। जब काफी देर तक बेटी ने कॉल रिसीव नहीं किया, तो भाई को कमरे में भेजा गया, जहां वैशाली का शव फंदे से लटका मिला।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और छात्रा का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया गया है। शुरुआती जांच में मामला मेंटल स्ट्रेस और प्रेशर से जुड़ा हुआ सामने आ रहा है।
मां काजल ने आरोप लगाया कि स्कूल में पढ़ाई को लेकर काफी प्रेशर बनाया जाता था, जिसकी वजह से बेटी रात-रात भर स्टडी करती रहती थी। वहीं भाई प्रिंस का कहना है कि कुछ टीचर्स उसकी बहन की तुलना उससे करते थे, जिससे वह मेंटली परेशान रहने लगी थी। उसे बार-बार कहा जाता था कि वह अच्छे मार्क्स नहीं ला पाएगी, जो उसके आत्मविश्वास को तोड़ रहा था।
बताया जा रहा है कि वैशाली खुद को प्रूव करना चाहती थी और उसने 92% अंक हासिल भी किए, लेकिन वह अपने ही बनाए टारगेट तक नहीं पहुंच पाई, जिससे वह टूट गई।
इसी तरह की एक और घटना कानपुर के कल्याणपुर इलाके में सामने आई, जहां बीडीएस की छात्रा नाजिया हसन (23) ने हॉस्टल में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। वह महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में थर्ड ईयर की छात्रा थी और मूल रूप से बिहार के मुंगेर की रहने वाली थी। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और कारणों की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में बच्चों पर बढ़ता एकेडमिक प्रेशर और एक्सपेक्टेशन का बोझ कई बार उन्हें मेंटली कमजोर बना देता है। ऐसे में पैरेंट्स और टीचर्स को बच्चों के साथ बेहतर कम्युनिकेशन रखना चाहिए और उन्हें यह समझाना जरूरी है कि मार्क्स ही जिंदगी का आखिरी सच नहीं होते।

