जिस दर्द में प्रभु की याद जाग जाए, वह दर्द भी नेमत बन जाता-नवजीत भारद्वाज
जालंधर 20 अगस्त (ब्यूरो) : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।

सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान पूरा धाम मंत्रोच्चार, श्रद्धा और भक्ति की अलौकिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पवित्र अग्नि, वैदिक मंत्रों की गूंज और मां बगलामुखी के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा के साथ आहुतियां अर्पित कीं।

वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो धाम का प्रत्येक कण मां की कृपा और आध्यात्मिक शक्ति से स्पंदित हो रहा हो।
इस अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने सूफी संत बुल्ले शाह की प्रसिद्ध पंक्तियों—
*‘‘कह बुल्ला अब प्रेम कहानी,*
*जिस तन लागे सो तन जाने।*
*अंदर झिडक़ां, बाहर ताने,*
*नेह लगा यह सुख पाया है।*
*मेरे माही, क्यों चिर लगाया है’’*
का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पंक्तियां केवल सांसारिक प्रेम की बात नहीं करतीं, बल्कि उस रूहानी प्रेम की ओर संकेत करती हैं, जिसमें इंसान अपनी आत्मा से परमात्मा को पुकारता है। जिस हृदय में प्रभु प्रेम की लौ जल उठती है, उस तड़प और आनंद को वही व्यक्ति समझ सकता है जिसने सच्ची भक्ति का अनुभव किया हो। उन्होंने कहा कि प्रभु का प्रेम जितना गहरा होता है, उतनी ही गहरी उसकी प्यास होती है। संसार की सुख-सुविधाएं उस प्यास को शांत नहीं कर सकतीं।

नवजीत भारद्वाज ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार मछली पानी के बिना तड़प उठती है, उसी प्रकार जिस आत्मा को परमात्मा के नाम का स्वाद मिल जाता है, वह प्रभु स्मरण के बिना बेचैन रहने लगती है।

‘‘भक्ति कोई दिखावा नहीं है। भक्ति वह अवस्था है, जहां इंसान को दुनिया के बीच रहते हुए भी अपने मालिक की याद सताती रहती है।’’ इसी भाव को समझाते हुए नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि चातक पक्षी वर्षा की बूंद की प्रतीक्षा करता है। लोकमान्यता है यदि यह पक्षी अत्यधिक प्यासा हो और उसे पानी से भरी झील में भी छोड़ दिया जाए, तो भी यह अपनी चोंच नहीं खोलता। यह प्यास से मरना स्वीकार कर लेता है लेकिन जमीन पर गिरा पानी नहीं पीता। इसी तरह सच्चे भक्त को संसार की हजार खुशियों से अधिक अपने प्रभु के नाम की एक बूंद प्यारी होती।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को कहा कि रूहानी प्रेम में कभी-कभी दर्द भी आता है। लोग ताने देते हैं, अपने समझ नहीं पाते और परिस्थितियां इंसान को तोडऩे लगती हैं। लेकिन याद रखिए जिस दर्द में प्रभु की याद जाग जाए, वह दर्द भी नेमत बन जाता है। कभी-कभी हमें लगता है कि मालिक हमारी पुकार नहीं सुन रहा। लेकिन वह दूर नहीं होता, हमारी ही आंखों पर दुनिया की धूल जमी होती है। हम उसे बाहर खोजते रहते हैं, जबकि वह हमारे अंदर सांस बनकर बैठा है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचन के अंत में कहा कि सोचिए, जिस घर में मां अपने बच्चे की आवाज बिना बोले समझ लेती है, उसी तरह मालिक (प्रभु) भी हमारी खामोश पुकार सुनता है। हमें बस भरोसा रखना है। सच्ची भक्ति का सबसे बड़ा आधार भरोसा है।
जब रास्ते बंद दिखाई दें, तब भी विश्वास रखें कि मां बगलामुखी की कृपा हमारे साथ है। जब मन टूटने लगे, तब नाम का सहारा लें। जब परिस्थितियां समझ से बाहर हों, तब अपने कर्म करते हुए परिणाम मां के चरणों में छोड़ दें।
इस अवसर पर राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, रोहित भाटिया,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन जगह उपरांत विशाल नगर भंडारी का आयोजन किया गया।
