प्राचीन मान्यताओं और श्रद्धा की परंपरा को संजोए ऐतिहासिक नगरी जालंधर

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प्राचीन मान्यताओं और श्रद्धा की परंपरा को संजोए ऐतिहासिक नगरी जालंधर

 

जालंधर 19 फरवरी (ब्यूरो) : पंजाब का ऐतिहासिक शहर जालंधर केवल औद्योगिक या शैक्षणिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। सदियों पुरानी मान्यताओं, प्राचीन मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और चर्चों की मौजूदगी इस शहर को आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बनाती है। यहां विभिन्न धर्मों के लोग आपसी भाईचारे और श्रद्धा के साथ अपने-अपने धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जालंधर की पहचान एक बहुधार्मिक और ऐतिहासिक शहर के रूप में स्थापित होती है।

जालंधर का नाम भी अपने आप में पौराणिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस शहर का नाम पौराणिक असुर राजा जलंधर के नाम पर पड़ा, जिसका उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने जलंधर का वध किया था और उसी से जुड़े कई धार्मिक स्थल आज भी इस शहर की पहचान बने हुए हैं। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि इस शहर की पौराणिक कथाओं और इतिहास को भी करीब से जानने का प्रयास करते हैं।

जालंधर के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है श्री देवी तालाब मंदिर। यह मंदिर माता दुर्गा को समर्पित है और इसकी गिनती पंजाब के प्रमुख शक्तिपीठों में की जाती है। मंदिर का इतिहास लगभग 200 साल पुराना बताया जाता है।

यहां स्थित पवित्र सरोवर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है, जहां लोग स्नान कर अपने जीवन की समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं। नवरात्रों के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा के माहौल से भर जाता है।

इसी तरह जालंधर में स्थित गुरुद्वारा छेवीं पातशाही सिख धर्म का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। इस गुरुद्वारे का संबंध सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी से माना जाता है।

कहा जाता है कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी यहां कुछ समय के लिए ठहरे थे, जिसके बाद इस स्थान को गुरुद्वारे के रूप में विकसित किया गया। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं और लंगर सेवा में भाग लेते हैं। गुरुद्वारे का शांत और आध्यात्मिक वातावरण लोगों को आंतरिक शांति प्रदान करता है।

जालंधर धार्मिक विविधता का उदाहरण इसलिए भी है क्योंकि यहां ईसाई धर्म से जुड़े ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं। शहर में स्थित सेंट मैरी कैथेड्रल चर्च उत्तर भारत के पुराने चर्चों में से एक माना जाता है।

इसकी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व इसे विशेष बनाते हैं। क्रिसमस के अवसर पर यहां विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। चर्च की भव्यता और शांति का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

इसके अलावा जालंधर में कई ऐतिहासिक मस्जिदें भी हैं, जो इस शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को समृद्ध बनाती हैं। यहां मुस्लिम समुदाय के लोग नियमित रूप से नमाज अदा करते हैं और धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

इन मस्जिदों की वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व शहर की बहुसांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाते हैं।

जालंधर का धार्मिक महत्व केवल पूजा स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आयोजित होने वाले धार्मिक उत्सव और मेले भी इसकी पहचान हैं। नवरात्र, गुरुपर्व, ईद और क्रिसमस जैसे विभिन्न त्योहार यहां पूरे उत्साह और सौहार्द के साथ मनाए जाते हैं। इन अवसरों पर शहर की गलियां रोशनी से जगमगा उठती हैं और हर धर्म के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर भाईचारे का संदेश देते हैं।

इतिहास के नजरिए से भी जालंधर का विशेष स्थान रहा है। प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक यह क्षेत्र विभिन्न शासकों के अधीन रहा, जिससे यहां की संस्कृति और परंपराओं में विविधता देखने को मिलती है। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि यह क्षेत्र प्राचीन सभ्यताओं का हिस्सा रहा है और यहां कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद रही हैं। समय के साथ शहर ने आधुनिकता को अपनाया, लेकिन अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आज भी संजोकर रखा है।

जालंधर का धार्मिक महत्व सामाजिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। यहां के धार्मिक स्थल केवल पूजा के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा के भी महत्वपूर्ण स्थान हैं। गुरुद्वारों में लंगर सेवा, मंदिरों में भंडारे और चर्चों में सामाजिक कार्यक्रम जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए आयोजित किए जाते हैं। इससे समाज में सहयोग और सेवा की भावना को बढ़ावा मिलता है।

शहर की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां के धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के साथ-साथ शहर की संस्कृति और इतिहास को जानने का प्रयास करते हैं। धार्मिक पर्यटन के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है और शहर की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत होती है।

जालंधर की खासियत यह है कि यहां विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। मंदिरों की घंटियां, गुरुद्वारों की गुरबाणी, मस्जिदों की अजान और चर्च की प्रार्थनाएं एक साथ इस शहर की आध्यात्मिक पहचान को दर्शाती हैं। यही विविधता इसे अन्य शहरों से अलग बनाती है और सामाजिक सौहार्द का संदेश देती है।

वर्तमान समय में भी जालंधर अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को बनाए हुए है। आधुनिक विकास के बावजूद यहां के लोगों ने अपनी परंपराओं और आस्थाओं को जीवित रखा है। धार्मिक स्थलों का संरक्षण और उनके प्रति लोगों की श्रद्धा इस बात का प्रमाण है कि जालंधर केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

इस प्रकार जालंधर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहां आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सदियों पुरानी परंपराएं, विभिन्न धर्मों के पूजास्थल और आपसी भाईचारे की भावना इस शहर को विशेष बनाती है। यही कारण है कि जालंधर आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है, जहां हर कदम पर इतिहास की झलक और आस्था की अनुभूति होती है।

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