प्रेम में डूबे हुए भक्त को मंजिल की चिंता नहीं, उसे सफर ही प्रिय होता : नवजीत भारद्वाज
जालंधर 19 फरवरी (ब्यूरो) : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।

सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान अमित कुमार से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित माँ भक्तों को अपने प्रवचनों से आध्यात्मिक रस से सरोबार करते हुए कहा कि इंसान जब किसी शख्स, विचार, सिद्धांत या खुदा से जुड़ता है तो उसका जुड़ाव एक सा नहीं होता। भावनाओं और समझ की गहराई के आधार पर यह रिश्ता तीन रूप ले लेता है।

मुरीद, मरीज और आशिक (ईश्वर के प्रति नि:स्वार्थ प्रेम में डूबा हुआ भक्त)
नवजीत भारद्वाज जी ने समझाया कि मुरीद वह है जो प्रभावित होता है, लेकिन विवेक नहीं खोता। वह श्रद्धा रखता है, सीखता है, मार्गदर्शन स्वीकार करता है और अपने आदर्श (गुरु) के बताए रास्ते पर चलने की कोशिश करता है। उसका संबंध आस्था से जुड़ा होता है, पर उसमें संतुलन भी बना रहता है। वह सवाल पूछने से डरता नहीं, बल्कि प्रश्नों के माध्यम से और परिपक्व होता है। मुरीद की भक्ति में समझ शामिल होती है।

नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि मरीज वह है जो लगाव में इस हद तक डूब जाता है कि अपनी सोच की स्वतंत्रता खो बैठता है। उसके लिए व्यक्ति या विचार ही अंतिम सत्य बन जाता है। वह आलोचना को अपमान समझता है और असहमति को दुश्मनी। मरीज का जुड़ाव श्रद्धा से ज्यादा निर्भरता पर आधारित होता है। वह खुद को भूलकर किसी और की छाया बन जाता है।

नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को समझाया कि इन दोनों से अलग होता है आशिक (ईश्वर के प्रति नि:स्वार्थ प्रेम में डूबा हुआ भक्त)
आशिक का रिश्ता शर्तों और अपेक्षाओं से परे होता है। वह पाने के लिए नहीं, बल्कि समर्पित होने के लिए प्रेम करता है। उसके लिए प्रेम लेन-देन नहीं, इबादत होता है। आशिक मंजिल की चिंता नहीं करता, उसे सफर ही प्रिय होता है। वह खोता नहीं, बल्कि मिटकर अपने असली अस्तित्व को पा लेता है।
उसका समर्पण स्वार्थरहित होता है। प्रवचनों के अंत में नवजीत भारद्वाज जी ने संत परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि यही भाव हमें मीरा बाई और कबीर जैसे संतों की याद दिलाता है, जिन्होंने प्रेम और भक्ति को जीवन का आधार बनाया।
अंतत: उन्होंने कहा मुरीद सीखता है, मरीज खो जाता है, और आशिक खुद को पा लेता है। यही तीन अवस्थाएँ तय करती हैं कि हमारा जुड़ाव हमें मजबूत करेगा, निर्भर बनाएगा या आत्मबोध तक पहुँचाएगा।
इस अवसर पर अजीत कुमार,उदय,राकेश प्रभाकर,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा,ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, नवीन,सुधीर, सुमीत , मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,सुक्खा,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर, प्रवीण,राजू,रोहित भाटिया, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

