India में Launch के लिए तैयार Afrezza, Diabetes Patients को मिलेगी राहत

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India में Launch के लिए तैयार Afrezza, Diabetes Patients को मिलेगी राहत

न्यूज़ नेटवर्क 24 दिसंबर (ब्यूरो) : सांस के जरिए इंसुलिन लेने की तकनीक अब भारत में भी दस्तक देने जा रही है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि अब उन्हें रोज़ाना सुई और इंजेक्शन की चुभन नहीं झेलनी पड़ेगी। देश की जानी-मानी दवा कंपनी सिप्ला ने भारत में इन्हेल्ड इंसुलिन लॉन्च करने की घोषणा की है, जो सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर ब्लड शुगर को नियंत्रित करेगी।

भारत में इस समय 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। इनमें करीब 10 लाख लोग टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जिन्हें नियमित रूप से इंसुलिन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज के कई मरीजों को भी समय-समय पर इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ता है। डायबिटीज देश में तेजी से फैलती बीमारियों में शामिल है, जो स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।

अब तक इंसुलिन केवल इंजेक्शन के जरिए ही शरीर में दी जाती थी, जिससे कई मरीजों को दर्द, डर और असहजता का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सिप्ला ने इंसुलिन देने के पारंपरिक तरीके में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी भारत में ‘अफ्रेजा’ नाम की रैपिड एक्टिंग इन्हेल्ड इंसुलिन पाउडर लॉन्च करने जा रही है, जिसे मरीज सांस के जरिए ले सकेंगे।

कंपनी के अनुसार, इस नई तकनीक वाली इंसुलिन को सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से मंजूरी मिल चुकी है। मंजूरी मिलने के बाद अब इसे भारतीय बाजार में उतारने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यह इंसुलिन तेजी से असर दिखाने वाली बताई जा रही है, जिससे भोजन के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

इन्हेल्ड इंसुलिन का इस्तेमाल एक छोटे पोर्टेबल इन्हेलर के जरिए किया जाएगा। इसमें सिंगल यूज़ कार्ट्रिज होती है, जिसे डॉक्टर द्वारा बताई गई डोज के अनुसार इन्हेलर में लगाया जाता है। इसके बाद मरीज सामान्य सांस लेते हुए इंसुलिन को अपने शरीर में पहुंचा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह आसान और दर्द रहित है।

सिप्ला के अधिकारियों का कहना है कि इस नई इंसुलिन तकनीक से डायबिटीज मरीजों की जीवनशैली में बड़ा सुधार आएगा। रोज़-रोज़ इंजेक्शन लेने की मजबूरी खत्म होने से मरीज मानसिक रूप से भी राहत महसूस करेंगे। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सुई से डरने वाले मरीजों के लिए यह तकनीक बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।

 

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