“कुछ दिन रुक जाओ बेटा” कहने पर बेटी ने उठाया खौफनाक कदम, यह कहना पिता को पड़ा इतना भरी की पूरी ज़िंदगी का बना पछतावा

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“कुछ दिन रुक जाओ बेटा” कहने पर बेटी ने उठाया खौफनाक कदम, यह कहना पिता को पड़ा इतना भरी की पूरी ज़िंदगी का बना पछतावा

न्यूज़ नेटवर्क 30 दिसंबर (ब्यूरो) : “बेटा, सब्जी बेचकर दिलवा दूंगा मोबाइल… बस कुछ दिन रुक जाओ। यह शब्द अब एक पिता के लिए जीवन भर का पछतावा बन चुके हैं। जालौन के मुहम्मदाबाद इलाके से आई यह कहानी सिर्फ एक मोबाइल फोन की नहीं, बल्कि टूटते सपनों, आर्थिक मजबूरी और समय पर न समझी गई भावनाओं की त्रासदी है।

डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव की रहने वाली 17 वर्षीय माया राजकीय इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा थी। पिता तुलसीराम राजपूत खेती और ऑटो चलाकर जैसे-तैसे परिवार का गुजारा करते थे। घर की आर्थिक हालत कमजोर थी, फिर भी वह अपनी बेटी की हर छोटी-बड़ी जरूरत पूरी करने की कोशिश करते रहे।

कुछ समय पहले माया का मोबाइल टूट गया। इसके बाद वह नया फोन मांगने लगी। बात साधारण मोबाइल से शुरू हुई, लेकिन जल्द ही उसकी जिद एक पुराने आईफोन पर आकर अटक गई, जिसकी कीमत करीब 40 हजार रुपये बताई जा रही थी। पिता ने समझाया कि अभी इतने पैसे नहीं हैं, लेकिन 15 दिन बाद मटर की फसल बिकते ही वह फोन दिला देंगे।

माया इंतजार को तैयार नहीं थी। परिजनों के मुताबिक वह जिद पर अड़ गई थी। कभी घड़ी की मांग, कभी सोने की झुमकी और आखिर में आईफोन। पिता ने हर बार उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन शायद वह उसकी मन की बेचैनी को पूरी तरह समझ नहीं पाए।

शुक्रवार को माया ने कहा था कि अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो अंजाम बुरा होगा। उस समय पिता उसकी बात का अर्थ नहीं समझ सके। रविवार को पिता ऑटो चलाने गए थे और मां खेत में मटर तोड़ने। घर पर माया अकेली थी।

इसी दौरान उसने चूहा मारने की दवा खा ली। जब छोटा भाई मानवेंद्र घर लौटा तो माया ने खुद बताया कि उसने जहर खा लिया है। परिजन घबराकर उसे उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, हालत गंभीर होने पर झांसी रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं।

आज तुलसीराम के पास सिर्फ पछतावा बचा है। वह कहते हैं कि घर में रखे 30 हजार रुपये बेटी को पता थे। उन्होंने उससे कहा था कि इन पैसों से वह सब्जी का काम शुरू करेंगे और मुनाफा होते ही फोन दिला देंगे। उन्हें क्या पता था कि बेटी यह कदम उठा लेगी।

“अगर मुझे जरा भी अंदाजा होता, तो मैं किसी भी हालत में उसे फोन दिला देता,” कहते हुए पिता की आंखें भर आती हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। लेकिन यह घटना समाज के लिए एक सवाल छोड़ जाती है—क्या हम अपने बच्चों की भावनाओं और दबाव को समय रहते समझ पा रहे हैं?

 

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