शेष नेत्र आश्रम श्री बद्रीनाथ धाम जी (उत्तराखंड) में 21 अप्रैल से 30 मई 2026 तक लगेगा आठवां वार्षिक भंडारा
जालंधर 1 अप्रैल (कोहली) : श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति रजि. जालन्धर की मीटिंग चैयरमैन जनेश अरोड़ा की रहनुमाई एवं अध्यक्ष सजीव शर्मा की अध्यक्षता में एक स्थानीय होटल में हुई उन्होंने बताया कि परम पुज्य श्री श्री 1008 अनंत श्री विभूषित ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज जी के आशीर्वाद से श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति रजि जालन्धर कीं तरफ से आठवां विशाल भण्डारा शेष नेत्र आश्रम श्री बद्रीनाथ धाम जी ( उत्तराखंड )में 21 अप्रैल 2026 से 30 मई 2026 तक लगाया जा रहा है।
श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति के महासचिव जतिंदर अरोड़ा ने बताया कि श्री बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित भगवान श्री विष्णु (बद्री विशाल) का एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है ऐसा माना जाता है कि मन्दिर का निर्माण वैदिक काल में हुआ था जिसका आदिगुरु शंकराचार्य जी ने 8वीं शताब्दी में पुनरूद्वार किया भारत के प्रसिद्ध चार धामों में से एक है समुद्र तल से लगभग 3,133 मीटर (10,279 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर नर-नारायण पर्वतों से घिरा हुआ है और यहा भगवान श्री विष्णु नारायण जी के बद्रीनारायण रूप की पूजा होती है
श्री बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है और इसे पृथ्वी का ‘भू-वैकुंठ’ भी कहा जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि श्री बद्रीनाथ धाम तथा इसके आस-पास का पूरा क्षेत्र किसी समय शिव भूमि (केदारखण्ड) के रूप में अवस्थित था जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई, तो यह बारह धाराओं में बँट गई तथा इस स्थान पर से होकर बहने वाली धारा अलकनन्दा के नाम से विख्यात हुई।भगवान विष्णु जब अपने ध्यानयोग हेतु उचित स्थान खोज रहे थे, तब उन्हें अलकनन्दा के समीप यह स्थान बहुत भा गया नीलकण्ठ पर्वत के समीप भगवान विष्णु ने बाल रूप में अवतार लिया, और रूदन करने लगे उनका रूदन सुन कर माता पार्वती जी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने बालक के समीप उपस्थित होकर उसे मनाने का प्रयास किया और बालक ने उनसे ध्यानयोग करने हेतू माग लिया।श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति के उप चैयरमैन मनदीप बक्शी ने बताया कि बद्रीकाश्रम में भगवान श्री विष्णु नारायण जी ने सभी जीवित इकाईयों के उद्धार हेतु नर तथा नारायण के रूप में अनंत काल से तपस्या में लीन है।
उन्होंने आगे कहा कि महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत इसी जगह पर लिखी थी और इसी स्थान पर पाण्डवों ने अपने पितरों का पिंडदान किया था इसी कारण से बद्रीनाथ के ब्रम्हाकपाल क्षेत्र में आज भी तीर्थयात्री अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते है
श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति के सीनियर उपाध्यक्ष डाक्टर पंकज | गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि पिछले साल की तरह इस साल भी श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति रजि. जालन्धर की तरफ से भंडारे में यात्रियों की सेवा में दिन-रात निःशुल्क शुद्ध वैष्णव भोजन, पराठा, गर्म चाय, गर्म दूध, बिस्कुट रस आदि के साथ साथ निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था रहेगी जिसमें जरूरतमंद यात्रियों को फ्री दवाइयां भी दी जाएंगी।
श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति के संगठन सचिव शिव सूद एवं जोनी वढेरा ने बताया कि भंडारे के लिए कमेटी के सदस्यों की तरफ से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले भक्तों के साथ-साथ शहर के मंदिर कमेटियों एवं धार्मिक संस्थाओ से सम्पर्क किया जा रहा हैं और भंडारे में रात्रि में दर्शन करके आने वाले यात्रियों की समस्या को दूर करने के लिए इस बार भंडारा स्थल के आसपास पूरी लाइट्स लगाई जाएगी।
मीटिंग में विशेष से रूप से सुनील मेहरा, गुलशन दुआ, राहुल, अश्वनी कुमार, योगेश कंकड़ आदि उपस्थित थे

