आवारा कुत्तों से सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर, UGC के निर्देश से बढ़ा विवाद
न्यूज़ नेटवर्क 26 दिसंबर (ब्यूरो) : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हरियाणा के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की निगरानी और उनसे बचाव के लिए एक-एक प्रोफेसर या शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। नोडल अधिकारी का कार्य स्थानीय प्रशासन या नगर निगम को समस्या की सूचना देना होगा।
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के बाद रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, कैथल, हिसार सहित कई जिलों में जिला शिक्षा कार्यालयों ने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक स्कूल में एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय परिसर में नोडल अधिकारी का नाम, पद और मोबाइल नंबर प्रदर्शित किया जाएगा। सभी स्कूलों से इसकी रिपोर्ट शुक्रवार तक मांगी गई है।
इधर, शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले ही शिक्षण कार्य के अलावा 20 से अधिक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में आवारा कुत्तों की निगरानी जैसी जिम्मेदारी सौंपना शिक्षकों पर अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ है।
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए शिक्षकों को नोडल अधिकारी बनाना पूरी तरह असंगत है। शिक्षक का मूल दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि पशु नियंत्रण या प्रशासनिक कार्य करना। इस तरह के आदेश शिक्षकों की कार्यक्षमता और शिक्षा व्यवस्था दोनों को प्रभावित करते हैं।


