जालंधर : ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियां, ओवरलोड वाहनों से बढ़ा जोखिम

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सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक, प्रशासन मौन

जालंधर 25 फरवरी (ब्यूरो) : Punjab के औद्योगिक और व्यस्त शहर जालंधर में ओवरलोड वाहनों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर की सड़कों पर आए दिन ओवरलोड ट्रकों और छोटे वाहनों की आवाजाही से न केवल ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार शहर में पहले भी ओवरलोड वाहनों के कारण कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर जरूरत से अधिक सामान लादकर वाहन चलाए जा रहे हैं। ऐसे वाहन अक्सर संतुलन खोने का खतरा पैदा करते हैं, जिससे अन्य राहगीरों और वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

 

बुधवार को शहर के दो मोरिया पुल फ्लाईओवर पर एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां गत्ते से भरा एक ट्रक देखा गया। ट्रक में क्षमता से कहीं अधिक सामान लादा गया था और उसकी ऊंचाई इतनी ज्यादा थी कि उसे देखकर आसपास से गुजर रहे लोगों में डर का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक का संतुलन बिगड़ने की आशंका लगातार बनी हुई थी और यदि अचानक ब्रेक लगती या मोड़ आता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में ओवरलोड वाहनों की समस्या नई नहीं है। अक्सर रात के समय या व्यस्त सड़कों पर भारी वाहनों में जरूरत से ज्यादा माल भरकर परिवहन किया जाता है। इससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही सड़कों और फ्लाईओवर की संरचना को भी नुकसान पहुंचता है। लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित विभाग इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहा।

 

ट्रैफिक नियमों के अनुसार किसी भी वाहन में निर्धारित सीमा से अधिक वजन या ऊंचाई तक सामान लादना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद परिवहन कंपनियां और वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोडिंग के कारण वाहन के ब्रेक सिस्टम, टायर और संतुलन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

 

शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं।

 

वहीं ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सड़कों पर निगरानी बढ़ाने, वाहनों की नियमित जांच करने और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाने जैसे उपाय ही इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकते हैं।

 

फिलहाल शहर में ओवरलोड वाहनों की बढ़ती संख्या प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं और शहरवासियों को इस खतरे से राहत मिल पाती है या नहीं।

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