जालंधर में बिना परमिशन सरकारी प्रॉपर्टी पर पोस्टर लगा रहे युवकों को रोका, समाजसेवी ने मौके पर उतरवाए पोस्टर
जालंधर 14 मार्च (ब्यूरो) : शनिवार दोपहर जालंधर के दोमोरिया पुल पर सरकारी संपत्ति को खराब करने का मामला सामने आया। पुल की दीवारों पर कुछ लोग पोस्टर चिपकाते हुए दिखाई दिए। इसी दौरान वहां से गुजर रहे समाजसेवी पुष्पिंदर शर्मा की नजर जब पुल की दीवारों पर लगाए जा रहे पोस्टरों पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत इस पर आपत्ति जताई और मौके पर ही पोस्टर लगाने वाले व्यक्तियों को रोक लिया।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार दो व्यक्ति पुल की दीवारों पर एक के बाद एक पोस्टर चिपकाने का काम कर रहे थे, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था और दीवारों की सुंदरता भी खराब हो रही थी। समाजसेवी पुष्पिंदर शर्मा ने दोनों व्यक्तियों को समझाते हुए कहा कि सरकारी संपत्ति पर बिना अनुमति पोस्टर या बैनर लगाना कानूनन गलत है और इससे शहर की साफ-सफाई और सुंदरता भी प्रभावित होती है।
पुष्पिंदर शर्मा ने सख्ती दिखाते हुए पोस्टर लगाने वालों से वहीं खड़े-खड़े पुल की दीवारों पर लगाए गए सभी पोस्टर उतरवाए। पहले तो दोनों व्यक्तियों ने थोड़ी बहस करने की कोशिश की, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी गलती मानते हुए दीवारों से पोस्टर हटाने शुरू कर दिए। कुछ ही देर में पुल की दीवारों से सभी पोस्टर हटा दिए गए, जिसके बाद वहां का माहौल सामान्य हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई जगहों पर पुलों, फ्लाईओवरों, बिजली के खंभों और सरकारी दीवारों पर बिना अनुमति पोस्टर और बैनर लगा दिए जाते हैं, जिससे शहर की सुंदरता खराब होती है। कई बार राजनीतिक कार्यक्रमों, निजी आयोजनों या विज्ञापन के लिए भी लोग बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल कर लेते हैं।
कानूनी तौर पर देखा जाए तो सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति पर बिना अनुमति पोस्टर, बैनर या विज्ञापन लगाना अपराध की श्रेणी में आता है। पब्लिक प्रॉपर्टी डिफेसमेंट से जुड़े नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति सरकारी दीवारों, पुलों, फ्लाईओवरों या अन्य सार्वजनिक स्थानों को पोस्टर या पेंटिंग के जरिए खराब करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति पर आमतौर पर 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि मामला गंभीर हो या बार-बार नियमों का उल्लंघन किया जाए तो पुलिस द्वारा केस दर्ज कर कार्रवाई भी की जा सकती है। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को एक साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
प्रशासन और नगर निगम की ओर से समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है कि शहर की दीवारों, पुलों और अन्य सरकारी संपत्तियों को साफ-सुथरा रखा जाए और बिना अनुमति पोस्टर या बैनर लगाने से बचा जाए। साथ ही किसी भी प्रकार का विज्ञापन या पोस्टर लगाने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है।
स्थानीय लोगों ने भी इस तरह की घटनाओं पर प्रशासन से सख्ती करने की मांग की है, ताकि शहर की सुंदरता बनी रहे और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर रोक लग सके।

