खेतों में गूंजती रही मासूम की चीखें,कुत्तों के झुंड ने छीनी बच्चे की सांसें,आवारा कुत्तों के हमले से मासूम ने तोड़ा दम
जालंधर,कपूरथला 27 फरवरी (सुखविंदर बग्गा) : जालंधर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच सुल्तानपुर लोधी से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। खेतों में अपने पिता को खाना देने गए 8 वर्षीय मासूम बच्चे पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।
मृतक बच्चे की पहचान 8 वर्षीय इतवारी के रूप में हुई है, जो सुल्तानपुर लोधी के गिला गाखला गांव का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि उसका परिवार मूल रूप से बहराइच का निवासी है और कामकाज के सिलसिले में यहां रह रहा था। परिवार मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहा था, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं।
मिली जानकारी के अनुसार घटना आज दोपहर की है। इतवारी अपनी मां के साथ खेतों में काम कर रहे पिता को खाना देने गया था। बच्चे के पिता मुनेजर खेत में आलू की बुआई कर रहे थे। परिवार रोजाना की तरह अपने काम में व्यस्त था और किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में इतना बड़ा हादसा हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि खेत में पहुंचने के कुछ समय बाद बच्चे ने बाथरूम जाने की बात कही और पास ही खेतों की ओर चला गया। इसी दौरान वहां पहले से घूम रहे 5 से 6 आवारा कुत्तों के झुंड ने बच्चे को अकेला देखकर उस पर हमला कर दिया। कुत्तों ने मासूम को बुरी तरह नोच डाला।
आखिर कब तक आवारा कुत्तों के आतंक से मासूमों की जान जाती रहेगी… कब जागेंगी सरकारें और कब जागेगा प्रशासन? यह सवाल अब हर उस परिवार के दिल में उठ रहा है, जो अपने बच्चों को घर से बाहर भेजते समय डर और चिंता में जी रहा है।
बच्चे की चीख-पुकार सुनकर माता-पिता तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया। उस समय तक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो चुका था और उसके शरीर पर कई जगह गहरे जख्म थे। परिजन उसे तुरंत इलाज के लिए जालंधर के सिविल अस्पताल जालंधर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता सदमे में हैं। परिवार के अन्य सदस्य और स्थानीय लोग भी इस घटना से बेहद दुखी हैं। गांव में मातम का माहौल है और हर आंख नम दिखाई दे रही revealing है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। खेतों और गलियों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को हमेशा खतरा बना रहता है। लोगों ने कई बार प्रशासन से शिकायत भी की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
इस घटना के बाद लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते आवारा कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण किया जाता तो शायद एक मासूम की जान बच सकती थी। लोगों ने प्रशासन से इलाके में आवारा कुत्तों को पकड़ने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
यह हृदय विदारक घटना एक बार फिर आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मासूम इतवारी की मौत ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी और कब लोगों को इस समस्या से राहत मिलेगी।

