परिवहन नीति के वादे अधूरे, कर्मचारियों ने किया पंजाब भर में  आंदोलन का ऐलान,पढ़े

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परिवहन नीति के वादे अधूरे, कर्मचारियों ने किया पंजाब भर में  आंदोलन का ऐलान,पढ़े

जालंधर 22 जनवरी (ब्यूरो) : पंजाब रोडवेज पनबस जालंधर स्थित कॉमरेड जसवंत समरा भवन में हुई बैठक के बाद संगठन के नेताओं जगदीश सिंह चहल, गुरजंत सिंह कोकरी, दीदार सिंह मंड, अवतार सिंह तारी और गुरजीत सिंह (जालंधर) ने जालंधर प्रेस क्लब में संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता की।

नेताओं ने कहा कि पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश जनता ने 2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को मिली भारी जीत का स्वागत किया था। मजदूर वर्ग ने उम्मीद के साथ इस नई पार्टी का समर्थन किया, विशेष रूप से परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को भरोसा था कि अब राज्य की परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी। उनका कहना था कि पहले के दोनों बड़े दलों के नेताओं के खुद ट्रांसपोर्टर होने या बड़े ट्रांसपोर्टरों से नजदीकी संबंध होने के कारण सरकारी परिवहन को नुकसान झेलना पड़ा।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के चार साल पूरे होने के बावजूद सड़क परिवहन विभाग में एक भी नई बस शामिल नहीं की गई। जबकि अकाली दल सरकार के दस साल के कार्यकाल में 1483 बसें और कांग्रेस शासन में 868 बसें खरीदी गई थीं। मुख्यमंत्री द्वारा मंचों से नई परिवहन नीति लाने और निजी बसों को रोडवेज व पेप्सू में शामिल करने के दावे किए गए थे, लेकिन चार साल बाद भी न तो नीति आई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। उच्च न्यायालयों द्वारा 12210 परमिट रद्द करने के आदेश के बावजूद केवल 39 परमिट ही रद्द किए गए।

 

नेताओं ने बताया कि वर्ष 1997 के बाद से किसी भी सरकार ने इस सार्वजनिक परिवहन संस्थान को बजट से सीधा वित्तीय सहयोग नहीं दिया। महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा लागू की गई, लेकिन इसके एवज में सरकार पर अभी भी लगभग 500 करोड़ रुपये बकाया हैं। अन्य श्रेणियों की रियायती यात्रा और सरकारी रैलियों के खर्च के करीब 300 करोड़ रुपये भी विभाग को नहीं मिले हैं। इसी तरह पीआरटीसी पर भी लगभग इतनी ही राशि बकाया है। आर्थिक तंगी के कारण विभाग को डीजल और स्पेयर पार्ट्स खरीदने में कठिनाई हो रही है। सर्दियों के बीच तक बैटरियां तक नहीं खरीदी जा सकीं, जिसके चलते रोजाना करीब 400 बसें डिपो की वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं और इसका सीधा लाभ निजी बस ऑपरेटरों को मिल रहा है।

 

उन्होंने कहा कि कभी 2407 बसों का बेड़ा अब घटकर 1460 रह गया है, जिनमें से कई बसें जर्जर हालत में हैं। एनआरआई पंजाबियों के लिए शुरू की गई दिल्ली एयरपोर्ट वोल्वो बस सेवा भी अब बंद होने के कगार पर है। समय सारिणी में राजनीतिक हस्तक्षेप इतना बढ़ गया है कि कर्मचारियों के तबादले भी इसी आधार पर किए जा रहे हैं। नए टाइमटेबल बनाने का अधिकार निजी हाथों में सौंप दिया गया है, जबकि यह अधिकार सरकार के पास सुरक्षित है।

 

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि तबादलों के अधिकार छीनकर कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। कई तबादले राजनीतिक दबाव या रिश्वत के आधार पर किए गए। वर्कशॉप की हालत बेहद खराब है, थोड़ी बारिश में ही पानी भर जाता है और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है। मरम्मत के लिए पहले 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन आज तक एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। बड़ी संख्या में टिकट मशीनें खराब पड़ी हैं और कर्मचारियों की भारी कमी के बावजूद मृत कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी नहीं दी जा रही।

 

नेताओं ने कहा कि विभाग को कभी अनुभवी परिवहन मंत्री नहीं मिला और मौजूदा मंत्री भी अनुभवहीन व लापरवाह हैं। मुख्यालय और डिपो स्तर पर स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति न होने से मनमाने फैसले और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। पदोन्नति और मेडिकल बिलों के भुगतान के इंतजार में कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए या उनका निधन हो गया, लेकिन सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि सरकार का कार्यकाल अंतिम दौर में है, इसके बावजूद कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की कोई नीति नहीं लाई गई। कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे जनता का भरोसा भी विभाग से उठता जा रहा है।

 

अंत में नेताओं ने ऐलान किया कि मांगों की अनदेखी के विरोध में राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत 30 जनवरी, 4 फरवरी को अमृतसर, 11 फरवरी को पट्टी, 28 फरवरी को डिपो पर सुबह 11 से 2 बजे तक विरोध प्रदर्शन होंगे। इसके अलावा 7 मार्च 2026 को राज्यव्यापी रैली निकाली जाएगी, जिसमें अमृतसर, लुधियाना, तरनतारन और जालंधर सहित कई जिलों के कर्मचारी भाग लेंगे।

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