होशियारपुर 1 अप्रैल (ब्यूरो) : सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड (SIB) एवं अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन के संयुक्त तत्वावधान में “इन्हेदामे जन्नतुल बक़ी कॉन्फ्रेंस 2025” का भव्य आयोजन 6 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध सूफी तीर्थस्थल दरगाह हज़रत हाजी वारिस अली शाह (रह.), देवा शरीफ में किया जाएगा। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख धार्मिक विद्वान, सूफ़ी संत, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी एक मंच पर एकत्रित होकर जन्नतुल बक़ी की पुनर्स्थापना और उसके धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को जनमानस तक पहुँचाने के उद्देश्य से विचार-विमर्श करेंगे।
सम्मेलन के प्रमुख विषय एवं उद्देश्य:
यह सम्मेलन विशेष रूप से इतिहास की एक महत्वपूर्ण विरासत जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण की आवश्यकता और इसकी ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सामाजिक महत्ता पर केंद्रित होगा। सम्मेलन में यह चर्चा होगी कि कैसे वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को उठाया जाएँ।
इस कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य सभी धर्मों और संप्रदायों के बीच आपसी समन्वय और धार्मिक सौहार्द्र को बढ़ावा देना भी है। इस अवसर पर विश्वभर के विद्वानों, सूफ़ी संतो, सामाजिक नेताओं और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति इस आंदोलन को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।
मुख्य अतिथि एवं विशेष वक्ता:
सम्मेलन में देशभर से कई प्रतिष्ठित धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियाँ शामिल होंगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
• अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे रुशैद साहब
• मंसूर खान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड (SIB)
• डॉ. सूफी राज जैन, संस्थापक, सर्वधर्म ख्वाजा मंदिर, होशियारपुर, पंजाब एवं उत्तर भारत के उपाध्यक्ष, SIB
• सैयद ग़फ़्फ़ार हुसैन फ़रीदी, गद्दी नशीन, दरगाह अजमेर शरीफ, राजस्थान एवं अध्यक्ष, SIB
• श्री हनीफा जान, सांसद, लद्दाख
• तनुज पुनिया, सांसद, बाराबंकी
• आगा रूहुल्लाह मेहदी, सांसद, श्रीनगर
• अरविंद सिंह गोप, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री
आयोजकों की अपील:
सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड एवं अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों से सौहार्द एवं न्याय की इस ऐतिहासिक पहल में सहभागी बनने की अपील करता है। यह सम्मेलन न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे को उठाने का मंच प्रदान करेगा, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने का भी कार्य करेगा।
विशेष घोषणा:
आज से 100 वर्ष पूर्व, 1925 में, जन्नतुल बक़ी में मौजूद सैयदा बीबी फ़ातिमा ज़हरा (र.अ.) के रोज़े को ध्वस्त कर दिया गया था। इस सम्मेलन के माध्यम से उनके पुनर्निर्माण की अपील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाएगी, ताकि इस ऐतिहासिक अन्याय को दुरुस्त किया जा सके और संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
अतः, यह कॉन्फ्रेंस सिर्फ़ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पहल है जो आने वाली पीढ़ियों को उनके धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास से जोड़ने का कार्य करेगी।
