वाह रे सिस्टम! जालंधर के इस चौंक में स्ट्रेचर की बदल गई किस्मत,मरीजों की जगह पहुंचा रहा मलबा
जालंधर 28 फरवरी (ब्यूरो) : जालंधर के मशहूर कपूरथला चौक और कपूरथला रोड की हालत इन दिनों ऐसी हो चुकी है मानो चौक ने खुद ही इमरजेंसी घोषित कर दी हो। सड़क पर पड़े गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि धीमी रफ्तार से गुजरने पर भी सवारी को ऐसा महसूस होता है जैसे गाड़ी नहीं बल्कि स्ट्रेचर हिल रहा हो।
मौके पर आज जो दृश्य देखने को मिला, उसने लोगों को हैरान करने के साथ-साथ हंसी का मौका भी दे दिया। सड़क सुधार के नाम पर मलबा उठाने के लिए मरीजों को ले जाने वाले स्ट्रेचर का इस्तेमाल किया जा रहा था। आम तौर पर अस्पतालों में मरीजों की सेवा के लिए उपयोग होने वाला यह स्ट्रेचर यहां ईंट-पत्थर ढोने में लगा दिखाई दिया। कपूरथला चौक के पास एक निजी अस्पताल द्वारा किया गया यह अनोखा प्रयास चर्चा का विषय बना रहा।
स्थानीय लोग इस पर चुटकी लेते नजर आए। कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि चौक की हालत देखकर पहले इसका ब्लड प्रेशर जांच लेना चाहिए, उसके बाद गड्ढों का इलाज करना चाहिए। वहीं अन्य लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि अगर मलबा उठाना ही था तो नगर निगम से ट्रॉली मंगवाई जा सकती थी, स्ट्रेचर को मरीजों के लिए ही रहने दिया जाता।
एक ओर सड़क पर ट्रैफिक धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, तो दूसरी ओर स्ट्रेचर मलबा ढोने में व्यस्त था। पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सड़क का इलाज किसी मेडिकल प्रक्रिया की तरह किया जा रहा हो। लोगों ने यहां तक कह दिया कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में गड्ढों पर प्लास्टर चढ़ता भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि यह घटनाक्रम भले ही हास्य का कारण बना हो, लेकिन समस्या गंभीर है। शहर के प्रमुख चौक केवल यातायात का माध्यम ही नहीं होते, बल्कि शहर की छवि भी दर्शाते हैं। ऐसे में यदि उनकी मरम्मत इस तरह के अस्थायी उपायों से की जाएगी तो लोगों का सवाल उठाना स्वाभाविक है।
फिलहाल स्थिति यह है कि चौक की बदहाल हालत को देखकर ऐसा लगता है मानो यह तय करना मुश्किल हो गया हो कि इलाज सड़क का होना है या उस पर चलने वालों का। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा, ताकि सड़कें बेहतर हों और स्ट्रेचर अपने वास्तविक उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल किए जाएं।

