भोलेनाथ को प्रसन्न करने का दिन महाशिवरात्रि, जानें सही पूजा तरीका,पढ़े

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भोलेनाथ को प्रसन्न करने का दिन महाशिवरात्रि, जानें सही पूजा तरीका,पढ़े

न्यूज डेस्क 14 फरवरी (ब्यूरो) :
15 फरवरी 2026 यानी रविवार को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का विशेष अभिषेक करते हैं। आइए जानते हैं कि इस दिन भगवान शंकर की पूजा किस प्रकार करनी चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिव तत्व अत्यंत जागृत रहता है और उनकी पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किया गया व्रत और पूजा व्यक्ति के पापों का नाश कर मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

महाशिवरात्रि पर पूजा की सही विधि

महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या शिव मंदिर में जाकर पूजा की तैयारी करनी चाहिए। सबसे पहले भगवान शिव का जल से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ध्यान रखें कि बेलपत्र तीन पत्तियों वाला हो और वह टूटा हुआ न हो। इसके अलावा धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन, भांग, फल और मिष्ठान भी भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं।

पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्तों को पूरे दिन भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए और शाम या रात के समय शिव आरती करनी चाहिए। महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।

व्रत रखने का महत्व और नियम

महाशिवरात्रि पर व्रत रखने से शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है। इस दिन भक्त फलाहार या निर्जला व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर संयम और शुद्ध विचार बनाए रखने चाहिए। फल, दूध और सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि रातभर भगवान शिव का भजन-कीर्तन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगले दिन सुबह पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

महाशिवरात्रि पर क्या करना चाहिए

महाशिवरात्रि के दिन पूरे मन से भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। शिवलिंग का जल और दूध से अभिषेक करना चाहिए। बेलपत्र, धतूरा और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान देना भी इस दिन पुण्यदायी माना जाता है।

इस दिन क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखना ही सच्ची शिव भक्ति मानी जाती है।

महाशिवरात्रि पर क्या नहीं करना चाहिए

महाशिवरात्रि के दिन कुछ कार्यों से बचना भी आवश्यक माना गया है। इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। शिवलिंग पर केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में इसे अशुभ माना गया है।

पूजा में चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र कटे-फटे नहीं होने चाहिए। शिवलिंग पर तुलसी दल अर्पित करने से भी बचना चाहिए। इसके अलावा इस दिन किसी का अपमान करना, झूठ बोलना या क्रोध करना भी अनुचित माना जाता है।

ध्यान रखने योग्य विशेष बातें

महाशिवरात्रि के दिन साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा से पहले स्नान अवश्य करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली सामग्री शुद्ध और ताजा होनी चाहिए। पूजा के दौरान मन को एकाग्र रखें और पूरी श्रद्धा से आराधना करें।

यदि संभव हो तो इस दिन शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक करना चाहिए। हालांकि घर में भी विधि-विधान से पूजा करने पर समान फल प्राप्त होता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से महाशिवरात्रि का संदेश

महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम और साधना का अवसर भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सादगी, संयम और सकारात्मकता अपनाकर हम आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। भगवान शिव का स्वरूप त्याग, करुणा और कल्याण का प्रतीक है। उनकी पूजा हमें जीवन में संतुलन और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और रात्रि जागरण करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की आराधना की जाए तो जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इस प्रकार महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सच्ची श्रद्धा, शुद्ध आचरण और विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

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