मजदूर यूनियनों का केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, जालंधर में भारी पुलिस बल तैनात
जालंधर 12 फरवरी (ब्यूरो) : जालंधर में वीरवार को विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मिड डे मील वर्करों, आंगनवाड़ी कर्मियों, पेंडु मजदूर यूनियन और किसान संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मजदूर संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लागू करने जा रही है, जिससे मजदूर वर्ग के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और उनके कामकाज पर भी असर पड़ रहा है।
संविधान चौक के पास स्थित देश भगत यादगार हॉल के बाहर मजदूर यूनियनों ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। मौके पर पुलिस ने वाटर कैनन और अतिरिक्त पुलिस बसों की भी व्यवस्था की थी ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
मजदूर संगठनों के अनुसार, ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (एआईबीईए) सहित विभिन्न कर्मचारी, किसान और ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर यह हड़ताल की गई है। उनका कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के विरोध में भी यह कदम उठाया गया है। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल बैंक कर्मचारियों की हड़ताल नहीं, बल्कि देशभर के विभिन्न विभागों में कार्यरत मजदूरों की एकजुट कार्रवाई है।
पेंडु मजदूर यूनियन पंजाब के नेता कश्मीर सिंह ने कहा कि मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष और बलिदान देकर कई श्रम कानून बनवाए थे, जिनमें शोषण के खिलाफ लेबर कोर्ट में न्याय मांगने का अधिकार भी शामिल है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार इन कानूनों को समाप्त कर मजदूर विरोधी चार नए कानून लागू करना चाहती है, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है। इसी के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब सरकार भी मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है और केंद्र के नए कानूनों को लागू करने की दिशा में काम कर रही है, जिसे उन्होंने प्रदेश के लोगों के साथ धोखा बताया। कश्मीर सिंह ने कहा कि जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को उनके पास जाने से रोका गया, जिसे उन्होंने सरकार के निर्देश पर की गई कार्रवाई बताया।

