“इन्द्रियार्थेषु वैराग्यम नहंकार एव च ।जन्ममृत्युजराव्याधि दुःखदोषानुदर्शनम्”
अपने पितरों के मंगल कल्याण के लिए तथा स्वयं के भगवत सेवा व भागवत प्रेम प्राप्ति के लिए शुद्ध संतो के मुखारविंद से इस परम पवित्र ग्रंथ को श्रवण व मनन करना चाहिए। श्री श्रीमद् भागवत कथा रस धारा एवं श्री हरिनाम संकीर्तन पितृपक्ष के उपलक्ष्य में श्री राधा गोविंद देव मंदिर मंडी रोड जालंधर […]
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