जालंधर : नगर निगम ने दिन चढ़ते ही मंडी रोड पर डिच चला कर दी बड़ी करवाई

जालंधर 6 मार्च (ब्यूरो) : जालन्धर नगर निगम चाहे इस वक्त अवैध निर्माणों पर लगातार डिच चलाता नजर आ रहा है मगर यह कारवाई ज्यादातर सियासी रंजिश के चलते होती दिखाई दे रही है।

आज निगम कमिशनर अभिजीत कपलिश के आदेशों पर एक बार फिर मंडी फैंटनगंज में स्थित सैंट सोल्जर स्कूल के पीछे एक पुरानी फैक्टरी के अंदर बनाई जा रही 20 दुकानों की अवैध मार्किट पर एटीपी सुखदेव वशिष्ट ने डिच चला दी।

इस बाबत बीते दो सप्ताह पहले काम रुकवाने पहुंचे एटीपी सुखदेव वशिष्ट के साथ प्राप्टी मालिक के साथ विवाद हो गया था। प्राप्टी मालिक ने आरोप लगाया था कि उन्हे कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और बिना परमिशन उनकी प्राप्टी के अंदर आकर एटीपी सुखदेव वीडियोग्राफी कर रहे हैं मामला कमिशनर तक पहुंचने के बाद प्राप्टी मालिक को उसी समय नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे गए थे मगर नोटिस की अवधि खत्म होने तक प्राप्टी मालिक ने कोई दस्तावेज पेश नहीं किए और आज सुबह यहां डिच चला कर अंदर बनाए जा रहे पिल्लरों तथा दीवारों को गिरा दिया गया।


वहीं दूसरी ओर सैंदा गेट सब्जी वाले के पीछे एक पुराने खंडर के अंदर दो नई दुकानें बना ली गई इस सबंधि शिकायतों के बाद पूर्व कमिशनर करनेश शर्मा ने इस बिल्डिंग का राजीनामा रिजैक्ट कर दिया था और बिल्डिंग के खिलाफ कारवाई करने के आदेश दिए थे मगर तत्तकालीन एटीपी रजिंदर शर्मा ने कोई कारवाई नहीं की। सूबे में सत्ता परिवर्तन होने के बाद प्राप्टी मालिक ने सियासी दबाव के लिए आप नेता का सहारा लिया और निगम प्रशासन पर दबाव बना कर यहां दोबारा काम चालू कर दिया।

एक बार इस निर्माण को एटीपी सुखदेव वशिष्ट भी रुकवा चुके हैं और नोटिस भी जारी कर चुके हैं मगर इसके बावजूद निर्माण नहीं रुका और दो सप्ताह के भीतर ही आगे खाली छोड़े फ्रंट पर भी शटरिंग कर लैंटर डाल दिया गया। यह तस्वीर रविवार रात की है। निगम कमिशनर की छवि पर ऐसी कई अवैध इमारतें प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं जिन पर कारवाई करने की बजाए वह आंखे बंद करने के लिए अपने ही अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं।

इस मामले में निगम के तीन अधिकारियों सहित प्राप्टी मालिक के खिलाफ सीवीओ चंडीगढ़ में शिकायत भेजी जा रही है जिसमें पुरानी राजीनाम जिसे रिजैक्ट किया गया था और ताजा नोटिस जिसे एटीपी वशिष्ट ने जारी किया था मगर इसके बावजूद अवैध निर्माण नहीं रुका। एटीपी वशिष्ट का कहना है कि अगर नोटिस के बावजूद निर्माण किया गया है तो उसे डिमोलिश कर दिया जाएगा।

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