इंसानियत अभी भी जिंदा है,एक गिलहरी के बच्चे की जान बचाने के लिए महिला ने पिलाया अपना दूध

(बृजेश शर्मा) : आज के युग में जहां इंसान रिश्तो कुछ और इंसानियत को भूल रहा है तो वही एक महिला ने ऐसा काम करके दिखाया है जिससे जानवरों और इंसानों के बीच एक बार फिर से इंसानियत कायम हुई है।भगवान के बाद मां का दर्जा हमेशा ही ऊंचा रहा है।एक मां ही होती है जो अपने बच्चे के साथ दूसरे बच्चो का लालन पोषण करती।लेकिन जालंधर में एक ऐसी ही महिला है जिसने एक मां का फर्ज निभाते हुए गिलहरी के बच्चे को अपना दूध पिला उसको एक नया जीवन दिया है।

जालंधर की एक संस्था एनिमल प्रोटेक्शन फाउंडेशन के सदस्यों द्वारा एक गिलहरी के बच्चे जो अभी जन्मा ही था उसे संस्था की एक सदस्य हरप्रीत कौर ने अपना दूध पिला कर उसकी जान बचाई। हरप्रीत ने कहा कि जब इसे उनके पति युवी घर लेकर आए तो महज 2 से ढाई इंच का यह बच्चा हमें नहीं पता था किस जानवर का है लेकिन उसकी हालत देखकर मुझसे रहा नहीं गया। जैसे मैं अपने बच्चे को दूध पिलाती हूं वैसे ही मैंने अपना दूध इस गिलहरी के बच्चे को पिलाया। ताकि इस नव जन्मे बच्चे की जान बच सके। बच्चा कोई भी हो इंसान का यह जानवर का या कोई भी जानवर हो उसे बचाने को हर इंसान को आगे आना चाहिए। ताकि उसकी भी हम अपने बच्चे की तरह ही केयर करके जान बचा सके।

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वहीं दूसरी ओर एनिमल प्रोटेक्शन फाउंडेशन के प्रेसिडेंट ने बताया कि हमें 2 दिन पहले अर्बन एस्टेट से फोन आया यहां पर एक जानवर का बच्चा है जो जमीन पर गिरा पड़ा है। तब युवी ने कहा कि आपसे संभाल कर रखें। सुबह को हम आकर ले जाएंगे। जब हम इसे लेकर आये तब देखा तो हमे पता भी नही चल रहा था कि यह किस जानवर का बच्चा है। लेकिन हम इसे घर लेकर आए। तब हमने घर आकर इसे अच्छी तरह से कॉटन में रखा और बाघ ने मेरी पत्नी हरप्रीत कौर ने इसे अपना दूध पिला कर इसकी जान बचाई।

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